Tuesday, 22 February 2011

चौथी कक्षा : २० फ़रवरी २०११

आज की प्राथमिक कक्षा में मुख्यतः कपिल जी की जिम्मेदारी थी और रवि जी सहायक की भूमिका में थे. कक्षा में उन्होंने स्वरों का बच्चों को अभ्यास कराया. कुछ बच्चे तो अच्छी गति से सीख रहे हैं मगर जो बच्चे इस साल नए हैं उनके लिए थोडा समय लग रहा है मगर रवि जी और कपिल जी दोनों का ही यह विशवास है की वे आपेक्षित गति से जल्दी ही भाषा सीख लेंगे. अगले सप्ताह स्वर-व्यंजनों के उच्चारण और लेखन का अभ्यास जारी रख्खा जायेगा.
परिचय कक्षा की जिम्मेदारी मेरी थी और बच्चों ने आज मात्राओं का और अभ्यास किया और साथ में कुछ रंगों का हिंदी में उच्चारण किया. बच्चे अब कक्षा में हिंदी में बात करते हैं. इसलिए यह महत्वपूर्ण है की यदि आप भी घर पर बच्चों से हिंदी में बात करें और उन्हें प्रोत्साहित करें तो उनका हिंदी ज्ञान और बढेगा और वे कक्षा में और अधिक उत्साही हो कर आयेंगे. परिचय कक्षा में ग्रह कार्य के लिए एक फोटो रंग करने के लिए दी गयी है और साथ में बच्चों को कुछ नए रंगों को ढून्ढ कर लाना है. आज कक्षा में बच्चों से बताया गया की अगली कक्षा से वे एक नोट पैड या फिर रजिस्टर भी लायें उसपर बच्चे हिंदी लेखन का अभ्यास करेंगे.अगली परिचय कक्षा में हम लोग १ से १०० तक नंबर और कुछ हिंदी के वाक्य बनायेंगे.
                    आज के सत्र का समापन बड़ा ही अव्यवस्थित रहा. इस अव्यवस्था से यदि आपको कोई भी असुविधा हुई हो तो हम क्षमा प्रार्थी है. अगले सप्ताहांत मैं कुछ निजी काम से नगर से बाहर हूँ और मैं कक्षा नहीं ले सकूँगा. परन्तु अन्य स्वयंसेवक और स्वयंसेविकाएं परिचय कक्षा का सञ्चालन करेंगे. प्राथमिक कक्षा की जिम्मदारी रवि जी की है और आशा है हमारी हिंदी कक्षा सुचारू रूप से संम्पन्न होगी. कृपया अपने सुझाव हमें भेजते रहें 
धन्यवाद

Tuesday, 15 February 2011

तीसरी कक्षा - २०११

आज प्राथमिक कक्षा में कुछ और स्वरों के लिखने और उच्चारण का अभ्यास कराया. आज प्राथमिक कक्षा की मुख्य जिम्मेदारी रवि जी की थी. परन्तु आज कपिल जी भी आ गए थे तो कपिल जी ने कक्षा में सहायक की  भूमिका निभाई. गृह कार्य हेतु बच्चों को स्वरों का घर पर अभ्यास करने को कहा गया है. अगली कक्षा में स्वरों और व्यंजनों के अभ्यास को आगे ले जाया जायेगा.

परिचय कक्षा में आज हम लोगों ने बच्चों के मात्रा ज्ञान का अनुमान लगाया. हिंदी भाषा में मात्रा का ज्ञान होना बहुत आवशक है क्योंकि सभी वाक्यों को लिखने में हमें मात्राओं का ज्ञान तो होना ही चाहिए.  परिचय कक्षा की जिम्मेदारी मेरी थी.  परिचय कक्षा में बच्चों को मात्राओं का अच्छा गृह कार्य दिया गया और अभिभावकों से  अपेक्षा है की वे बच्चों को उनके गृह कार्य में प्रोत्साहित करेंगे. अगले सप्ताहांत हम लोग इन्ही मात्राओं के लेखन का अभ्यास करेंगे इसलिए यह बहुत जरूरी है कि बच्चे अपना गृह कार्य कर के आयें. साथ में हिंदी में विभिन्न रंगों का बच्चों को परिचय कराएँगे

उषा जी हमेशा की तरह सभी कक्षाओं में अतिरिक्त सहायक के रूप में अपनी जिम्मेदारिओं का निर्वहन कर रहीं थी. तो इस प्रकार आज कक्षा में हम सभी सहयोगी उपस्थित थे. अपनी कक्षा का समापन हमेशा की तरह कुछ खेल, योगासन और फिर गायत्री महामंत्र के साथ हुआ. अगली कक्षा में कपिल जी प्राथमिक कक्षा के मुख्य शिक्षक हैं और मैं परिचय कक्षा हेतु. आज की कक्षा में बच्चों की भी संख्या लगभग १८ हो गयी थी. बहुत अच्छा रहा .

आशा है आप लोगों को कक्षा के समय सारणी से लाभ मिल रहा होगा और आप इस ब्लॉग की मदद्दत से कक्षा के अन्दर का हाल समझ पा रहे होंगे. आपसे इतना ही अनुरोध है की आप भी हम सभी के साथ मिलकर अपने बच्चों के हिंदी अध्धन में मद्दत करें उनको घर में प्रेरित करके और स्वयं भी बच्चों से हिंदी में बोल के और उन्हें प्रेरित करें.

आज हिंदी की दोनों ही कक्षाओं में प्रवेश लेने का अंतिम दिन था. अत: आज के बाद अब नए प्रवेश नहीं लिए जायेंगे. नए प्रवेश पत्र अब अगस्त माह में खुलेंगे और नए बच्चों को उसमे प्रवेश मिल सकेगा. कुछ बच्ची अगस्त में प्राथमिक से परिचय कक्षा में प्रवेश पाएंगे. इसलिए बच्चों के साथ मेहनत करते रहिये अगर आपको लगता है कि हमारे बच्चों को हिंदी आनी ही चाहिए. और हमारा भी मार्ग दर्शन करते रहिये अपने सुझाव और आपेक्षाएं भेज कर.

अंत में, हम लोग अभी भी सूर्यनमस्कार योगासन से सम्बंधित सूचना के लिए आपके जवाब की प्रतीक्षा मैं हैं. हम लोगों को अभी तक केवल ३ उत्तर आयें हैं. यदि आप इच्छुक है कि आपका बच्चा अपनी हिंदी कक्षा के बाद खेल कूद और योगासन में भाग ले तो कृपया एनरोलमेंट एंड सूचना पत्र में हस्ताक्षर कर के भेज दें.
धन्यवाद

Wednesday, 9 February 2011

दूसरी कक्षा : २०११

इस सप्ताहांत दिनांक ०६ फ़रवरी २०११ को हमारी दूसरी हिंदी की कक्षा हुई. ८ फरवरी को बसंत पंचमी उत्सव होने की वजह से कक्षा का आरम्भ सरस्वती वंदना के साथ किया गया. सभी बच्चों ने "...या कुंदेंदु तुषार हार धवला ......." प्रार्थना की पहली कुछ पंक्तियाँ मिलकर गाई गयीं. बच्चों को इस प्रार्थना की एक प्रिंटेड कॉपी भी दी गयी. ताकि वे घर पर भी अभ्यास करें. बच्चों को इस उत्सव का महत्त्व भी बताया गया.

इसके साथ ही बच्चों को उनके अभिभावकों के लिए दो सूचना पत्र भी दिए गए. एक तो एनरोलमेंट फॉर्म है और दूसरा हिंदी कक्षा के बाद ३० मिनट का सभी को, बच्चों सहित, सूर्यनमस्कार और अन्य योगासनों के अभ्यास का आमंत्रण है.

एक और जरूरी बात अभिभावकों के लिए/ कि आगामी ६ फरवरी "प्रारंभिक हिंदी कक्षा" में एन्रोलेमेंट की अंतिम तारिख है और अगली यानी १३ फरवरी "परिचय हिंदी कक्षा" में प्रवेश की अंतिम तारिख है. उसके बाद हम बच्चों को अगले सत्र यानि अगस्त - सितेम्बर २०११ माह के लिए ही प्रवेश देंगे.

इसके अतिरिक साथ मैं आज से हमारे एक और सहयोगी कपिल जी ने बच्चों को पढ़ाने की शुरूवात की. वे प्रार्थमिक कक्षा हेतु रवि जी का मुख्य रूप से साथ देंगे.

इस प्रकार आज पहली बार दो कक्षाएं लगाई गयीं "प्राथमिक" और "परिचय". "हिंदी - प्रार्थमिक" कक्षा की जिम्मेदारी कपिल जी पर और दूसरी कक्षा "हिंदी - परिचय" की जिम्मेदारी मेरी थे. रवि जी आज व्यक्तिगत कारणों से नहीं आ सके और उषा जी हमेशा की तरह हम सभी के साथ मिल कर अपनी जिम्मेदारिओं का निर्वहन कर रही थीं. 

प्राथमिक कक्षा में स्वर और व्यंजन के उच्चारण और लेखन का अभ्यास किया गया और कपिल जी ने उषा जी की सहायता से सभी बच्चों को स्वरों का गा कर अच्छा अभ्यास करवाया. अगले सप्ताह से प्राथमिक कक्षा में व्यंजन पढाये जायेंगे और उन्हें लिखने का अभ्यास कराया जायेगा.

परिचय कक्षा में , जैसा की तय था,  बच्चों के उनके प्राथमिक हिंदी ज्ञान का अनुमान लगाया गया. उन्हें स्वरों और व्यंजनों को लिख कर और उच्चारित कर के सभी को सुनाना था और जैसा अनुमान था कि सभी बच्चों ने बहुत ही सुन्दर उच्चारण किया और लगभग १० मिनेट में सभी स्वरों और व्यंजनों का लिख लिया. यह बहुत ही अच्छी बात है और उनके इस कार्य-निष्पादन से मुझे पूरा विश्वास है कि परिचय कक्षा के बच्चों को अडवांस हिंदी में कोई दिक्कत नहीं होगी. अगले सप्ताहांत फिर से उनके मात्राओं के ज्ञान का अनुमान लगाया जायेगा. और यदि सुब अच्छा रहा, जैसा कि रहेगा ही, तो एक नए विषय "हिंदी में रंगों के उच्चारण और लेखन" का अभ्यास करवाया जायेगा.

प्रारंभिक कक्षा में बच्चों कि संख्या १६ थी तो परिचय कक्षा में ८ बच्चे थे.अभिभावकों से अनुरोध है की वे पेन या पेंसिल और अन्य जरूरी स्टैशनेरी उनके बच्चों के बैग में रख दें ताकि वे कक्षा में आत्म विश्वास से पूर्ण रहें

आज परिचय कक्षा की समय सारणी प्रस्तुत है सभी के अवलोकन हेतु . अभिभावकों से अपेक्षा है कि वे इस समय सारणी के अनुसार बच्चों के साथ घर पर हिंदी भाषा का अभ्यास करें.

हम इस ब्लॉग को अर्थ पूर्ण बनाने के लिए अभिभावकों के सुझाव और आपेक्षाओं का स्वागत करते हैं और हमें आशा है कि वे इस ब्लॉग को अर्थपूर्ण बनाने में सहयोग करेंगे. यदि आपको इस ब्लॉग पर कोई सलाह या सुझाव देना है तो आप ईमेल भी कर सकते हैं. हमारा ईमेल है "bvmcardiff@yahoo.com"

सत्र के समापन पर हम लोगों ने बच्चों के साथ कुछ खेल खेले और उनको योगासन जैसे सूर्यनमस्कार आसन का अभ्यास करवाया. बच्चों ने बड़े ही चाव से उसमे हिस्सा लिया. ३० मिनट के खेल के बाद हमारी हिंदी कक्षा समाप्त हो गयी.


Monday, 31 January 2011

प्रथम कक्षा २०११

इस सप्ताहांत अपनी हिंदी कक्षाएं विधिवत शुरू हो गयीं. उषा जी और रवि जी ने पहली प्राथमिक कक्षा के साथ इसका शुभारम्भ किया. मैं व्यक्तिगत कारणों से नगर में नहीं था, अत: कक्षा में उपस्थित नहीं रह सका. आज की कक्षा में बच्चों का परिचय हुआ और बच्चों को एक एक कर के स्वरों के उच्चारण का अभ्यास कराया गया. जैसा अनुमान था की हिंदी की पिछली कक्षाओं का बच्चों पर बहुत नहीं तो थोडा थोडा असर जरूर है. थोडा मैं इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि स्वरों को लिखने का उन्हें पुनः: अभ्यास करना है यद्यपि स्वरों को बच्चे थोडा थोडा उच्चारित कर पा रहे हैं. और हमेशा की तरह प्रार्थना के साथ कक्षा का समापन हुआ.
              अगले सप्ताहांत हम लोग दो कक्षाओं का सञ्चालन करेंगे, एक प्राथमिक और दूसरी परिचय. परिचय में अभी थोड़े ही बच्चे हैं आशा है वे हिंदी के थोडा एडवांस रुप को पसंद करेंगे. और साथ में हम लोग बसंत पच्चमी के उत्सव पर प्रकाश डालेंगे. वैसे यह उत्सव ८ फ़रवरी को है.
              प्राथमिक कक्षा में स्वरों का अभ्यास जारी रहेगा और परिचय कक्षा में हम पहले बच्चों के हिंदी ज्ञान का अनुमान लगायेंगे और फिर प्राथमिक कक्षा में पढाये गए विषयों का संक्षेप अभ्यास करेंगे. जैसा मैंने पहले भी लिखा था की आज के इस ब्लॉग में हम प्राथमिक कक्षा के विषय सूची को प्रसारित करते हैं.अगले सप्ताह परिचय कक्षा के आरम्भ के साथ ही हम परिचय कक्षा की विषय सूची और समय सारणी प्रस्तुत करेंगे. बच्चे या उनके अभिभावक इसे डाउनलोड कर सकते हैं और तदनुसार अपनी हिंदी की कक्षा में तैंयारी कर के आ सकते हैं.




Tuesday, 25 January 2011

हिंदी कक्षाएं - २०११

सबसे पहले आप सभी को अंग्रेजी नव वर्ष २०११ की शुभ कामनाएं.
हम अपने ब्लॉग को आगे बढ़ाते हैं और सबसे पहले अच्छी सूचना, अपनी हिंदी कक्षा के अगले सत्र का कार्यक्रम तैयार हो रहा है..
यदि आपको याद हो तो भारी बर्फ़बारी के कारण हमारे पिछले सत्र का समापन कार्यक्रम स्थगित हो गया था. अत: इस सत्र का आरम्भ हम लोग उसी समापन कार्यक्रम के आयोजन से किया. दिनांक २३ जनवरी दिन रविवार को यह कार्यक्रम था और आवश्यक सूचना अभिभावकों को भेज दी गयी थी. सभी ने बच्चों के साथ बढ चढ़ कर इसमें हिस्सा लिया. पहले बच्चों ने एक छोटा सा हिंदी का नाटक किया, फिर कुछ बच्चों ने अपने अपने वाद्य यन्त्र बजाये जो भी उन्हें आता था. फिर सभी ने मिलकर अमर शहीद नेता जी सुभाष चन्द्र बोस को याद किया क्योंकि उसी दिन यानि २३ जनवरी को  उनका जन्मदिन भी पड़ता है. अंत में सभी ने मिलकर भारत का राष्ट्र गान गया. कार्यक्रम के समापन के बाद एक दुसरे से भेंट की गयी और साथ में अल्प हार भी किया गया.
              महत्वपूर्ण बात, हम लोग हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओँ की कक्षाओं के सञ्चालन हेतु शिक्षक और गैर शिक्षक स्वयंसेवकों और स्वयसेविकाओं को आमंत्रित करते हैं की वे भी हमारी टीम को ज्वाइन करें और सब मिलकर बच्चों का मार्ग दर्शन करें. यदि आप इच्छुक हैं तो संपर्क करें ईमेल द्वारा. हमारा ईमेल एड्रेस है "bvmcardiff@yahoo.co.uk" और या इस ब्लॉग में अपना मेसेज दें.
               सभी अभिभावकों को यह सूचना दे दी गयी है की इस वर्ष हम लोग दो हिंदी की कक्षाएं चलाएंगे. एक प्राथमिक और दूसरी परिचय. "प्राथमिक" कक्षा में मूलतः हिंदी की शुरुवात करेंगे और जिन बच्चों को बिलकुल भी हिंदी  नहीं आती है उन्हें इसमें प्रवेश दिया जायेगा. परन्तु यदि बच्चा थोडा सा भी हिंदी के ज्ञान का प्रदर्शन करता है तो हम उससे थोडा आगे बढा कर "परिचय" नामक कक्षा में प्रवेश देंगे.
अभी हम कक्षाओं के सञ्चालन हेतु व्यवस्थाओं में व्यस्त हैं और जल्दी ही आप लोगों को अपने अगले सत्र के पूरे कार्यक्रम से अवगत करेंगे. और साथ में इस ब्लॉग में हम प्राथमिक और परिचय के समय सारणी और विषय सूची भी  अपलोड करेंगे.
तब तक आज्ञा दीजिये. शेष फिर .

Thursday, 30 December 2010

हिंदी भाषा का इतिहास - VI : अंग्रेजी राज और हिंदी

अंग्रेजों के शासन की स्थापना के समय प्रमुख भाषाएँ निम्नवत थीं:

१. अंग्रेजी भाषा जो कंपनी की अपनी भाषा थी
२. फ़ारसी जो मुस्लिम शासनकाल से देश की राज भाषा चली आ रही थी.
३. देसी भाषाएँ जो क्षेत्रीय भाषाएँ थीं और जिनमे हिंदी का स्थान बहुत ही महत्वपूर्ण था.

अंग्रेजी चूँकि उनकी अपनी भाषा थी इसलिए वह उसे ही राज भाषा बनाना चाहते थे. अंग्रेजी शासन की स्थापना के बाद कुछ भारतीय नेता भी उसके प्रति विशेष आकर्षित हुए और उसी के द्वारा भारतीयों को शिक्षा प्रदान करने की बात सोचने लगे, क्योंकि उन दिनों आधुनिक ज्ञान और विज्ञान की शिक्षा के लिए अंग्रेजी को ही ज्यादा उपयुक्त समझा जाने लगा था. यह मानसिकता आज़ादी मिलने के बाद भी बनी रही और इसका परिणाम यह हुआ की आज भी हम देश की राष्ट्र भाषा के रूप में हिंदी को भारत के सभी समुदाय और क्षेत्र के लोगों को स्वीकृत नहीं करवा पाए.

अंग्रेजों द्वारा अपनाई गयी भाषा नीति में देवनागरी और फारसी दोनों ही भाषाओँ को स्थान दिया. उन्होंने अपने सिक्कों और स्टाम्पों में फ़ारसी के साथ साथ नागरी लिपि को भी स्थान दिया. यह काफी भ्रामक स्थिति थी क्योंकि फारसी भाषा आम लोगों की भाषा नहीं थी और नागरी लिपि के स्थान पर उर्दू का प्रचलन बढ़ गया था.
स्वयं अंग्रेज अधिकारी गण इस विचार का प्रतिपादन करते थे. अंग्रेज विद्वान् गौस ने लिखा है 'आजकल की कचहरी की भाषा बड़ी कष्ट दायक है क्योंकि एक तो यह विदेशी है और दूसरे, इसे भारतवासिओं का अधिकाँश भाग नहीं जानता ' (स्वंतंत्रता पूर्व हिंदी के संघर्ष का इतिहास - रामगोपाल पृ 29 )
इस तथ्य से विचार पैदा हुआ की जन साधारण की भाषा हिंदी है न कि फ़ारसी पूरित उर्दू . इसलिए सन १८७० में सरकार ने एक आज्ञा पत्र जारी किया जिसमे कहा गया था कि ऐसी भाषा का उपयोग बढ़ना चाहिए जो एक कुलीन भारतीय फ़ारसी से पूर्णतया अनभिज्ञ रहते हुए भी बोलता है.

यहाँ यह बात ध्यान देने योग्य है कि हिंदी उर्दू में मूलतः व्याकरण भेद ही है. हिंदी का आधार संस्कृत है और उर्दू के लिए लोग फ़ारसी अरबी की सहायता लेते हैं. कुछ लोगों का तो यह भी मानना है की उर्दू कोई अलग भाषा नहीं है बल्कि वह हिंदी की ही एक साहित्यिक शैली मात्र है. डॉक्टर सुनीति कुमार चतुर्ज्र्या के अनुसार "सोलहवी शती में मुसलमान कविओं के द्वारा हिंदी को जाने या अनजाने फ़ारसी लिपि में लिखने के प्रयत्न में ही इस झगड़े के सूक्ष्म अंकुर निहित थे "  

इसके परिणाम स्वरुप ही हिंदी, उर्दू और हिन्दुस्तानी का वाद विवाद खड़ा हुआ. कंपनी की भाषा नीति का जो दुष्परिणाम निकला उसके बार में डॉक्टर सरनाम सिंह ने ठीक ही लिखा है - "अंग्रेजी शासनकाल की स्थापना से भाषा के क्षेत्र में एक विस्फोटक भावना का प्रजनन हुआ. धर्म की आढ़ में कूटनीतिक चालों को पोषित करने का अवसर लेकर शासकओं ने अपना उल्लू सीधा करने की चेष्टा की. उन्होंने 'हिन्दुस्तानी ' शब्द से एक ऐसे विष का प्रादुर्भाव किया, जो बढता और फैलता गया. हिंदी और उर्दू के सम्बन्ध में उससे एक निश्चित भेद दृष्टी हो गयी."

सूक्ष्म दृष्टी से देखने पर यह आसानी से समझा जा सकता है कि कंपनी भाषा नीति के विषय में सच्ची और ईमानदार नहीं थी. भाषा के क्षेत्र में वो ऐसी भ्रामक स्थिति पैदा करना चाहती थी जिससे सामान्य जनता को कठिनाई हो और उनकी भाषा सम्बन्धी भावनाओं को ठेस पहुंचे. अंग्रेजों ने जिस भाषा नीति को अपनाया और उसका पोषण कंपनी द्वारा स्थापित फोर्ट विल्लिंम कालेज ने किया. फोर्ट विल्लिंम कालेज की स्थापना लोर्ड वेलेजली (१७९८ - १८०५) द्वारा सैनिक और असैनिक कर्मचारिओं के लिए देसी भाषाओँ के अध्धयन के उद्देस्य से की गयी थी. यहाँ जिस भाषा को प्रोत्साहन दिया जाता था वह वस्तुत: 'हिन्दुस्तानी' कहलाती थी. उसमे अरबी-फ़ारसी का बाहुल्य रहता था परन्तु मूल ढांचा देवनागरी हिंदी पर ही आधारित था.
------------------------------------

सहायक ग्रन्थ सूची :

राज भाषा हिंदी - डॉ मालिक मोहम्मद
भारतीय आर्यभाषा और हिंदी - डॉक्टर सुनीति कुमार चतुर्ज्र्या
हिंदी का राजभाषा के रूप में विकास - डॉक्टर शिवराज शर्मा

Monday, 20 December 2010

उत्सव अप्डेट

दिनांक १९ दिसम्बर २०१० दिन रविवार : प्रथम सत्र समापन समारोह अप्डेट

ब्रिटेन में भारी बर्फवारी और खराब मौसम के चलते हमारा समापन कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा और संभवत: नए वर्ष में इस कार्यक्रम का पुनः आयोजन किया जायेगा. सभी अभिभावकों को ईमेल के माध्यम से इसकी जानकारी दे दी गयी थी और आशा है कि रविवार दिनांक १९ दिसम्बर को अभिभावकों अथवा बच्चों को किसी भी तरह कि असुविधा नहीं हुई होगी.
            हमारा हिंदी भाषा के इतिहास का मासिक आलेख  बहुत जल्दी इस ब्लॉग पर उपलब्ध होगा और उसके बाद हम अब जनवरी माह में मिलेंगे. तब तक शायद हम अपनी हिंदी कक्षा के अगले सत्र का भी विवरण दे सकेंगे. इसलिए कृपया इस ब्लॉग पर नियमित अपने सुझाव और सदभावनाएँ भेजते रहें. धन्यवाद.