तेरहवी कक्षा : दिनांक ३१ अक्टूबर २०१० दिन रविवार
आज की कक्षा में फैन्सी ड्रेस की ही धूम रही. बच्चे बहुत ही उत्साहित थे. कक्षा के कार्य कलाप समझाने के बाद पहले हम सब ने लगभग ४५ मिनट्स तक हिंदी का अभ्यास किया. बच्चे जिन वस्त्रों या चरित्र में आये थे उसको हिंदी में लिखना सिखाया गया. अंत के कुछ व्यंजनों जैसे क्ष, त्र, ज्ञ की अभ्यास शीट दी गयी जिसका अभ्यास बच्चे घर पर लिख कर करेंगे. इसी के साथ अब स्वरों और व्यंजनों को लिखने के अभ्यास का समापन हो गया. बच्चे अब वर्णमाला को पहचान सकते हैं और यदा कदा सही उच्चारण भी करते हैं. अब हमारा ध्यान मात्राओ की सहायता से सामान्य बोलचाल की हिंदी भाषा का बच्चों को अभ्यास करवाना हैं. अगली कक्षा में हम हिंदी, एक बोलचाल की भाषा के रूप में पढ़ाएंगे.
आज ४५ मिनट्स की कक्षा के बाद बच्चों ने अपने चरित्रों के बारे मैं सबको बताया. कोई बच्चा रावण, कुम्भकरण, मेघनाथ, रावण की सेना के राक्षस और कोई सूर्पनखा तो कोई बच्चा अहि रावण की वेशभूषा में आया था. बच्चों के मुह से इन चरित्रों के बारे में सुनकर बड़ा ही अच्छा लगा. उसके बाद बच्चों ने थोडा कला-शिल्प में दीपावली का एक सुन्दर कार्ड बनाया. हमेशा की तरह सभी ने मिलकर गायत्री महामंत्र के गायन के साथ कक्षा का समापन किया.
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