Monday, 20 December 2010

उत्सव अप्डेट

दिनांक १९ दिसम्बर २०१० दिन रविवार : प्रथम सत्र समापन समारोह अप्डेट

ब्रिटेन में भारी बर्फवारी और खराब मौसम के चलते हमारा समापन कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा और संभवत: नए वर्ष में इस कार्यक्रम का पुनः आयोजन किया जायेगा. सभी अभिभावकों को ईमेल के माध्यम से इसकी जानकारी दे दी गयी थी और आशा है कि रविवार दिनांक १९ दिसम्बर को अभिभावकों अथवा बच्चों को किसी भी तरह कि असुविधा नहीं हुई होगी.
            हमारा हिंदी भाषा के इतिहास का मासिक आलेख  बहुत जल्दी इस ब्लॉग पर उपलब्ध होगा और उसके बाद हम अब जनवरी माह में मिलेंगे. तब तक शायद हम अपनी हिंदी कक्षा के अगले सत्र का भी विवरण दे सकेंगे. इसलिए कृपया इस ब्लॉग पर नियमित अपने सुझाव और सदभावनाएँ भेजते रहें. धन्यवाद.

Sunday, 12 December 2010

उन्नीसवीं कक्षा

उन्नीसवीं कक्षा - दिनांक १० दिसम्बर २०१० दिन रविवार

जैसा मैंने अपने पिछले ब्लॉग में लिखा था कि मैं तीन हफ़्तों के अवकाश में था और इस दौरान मेरे सहयोगी श्री रवि जी और श्रीमती उषा जी ने सोलहवीं, सत्रहवीं और अठारवीं कक्षाओं की बड़ी ही कुशलता पूर्वक जिम्मेदारी उठाई. इन कक्षाओं में मोटा मोटी हिंदी बोलचाल की भाषा के रूप में बच्चों को अभ्यास कराया गया.
                     आज की यानी उन्नीसवीं कक्षा की जिम्मेदारी मेरी थी और मैंने आज बच्चों के साथ हिंदी में १० तक गिनती का अभ्यास किया. उसके बाद एक छोटी से कविता का बच्चों को अभ्यास करवाया. वह कविता मैंने कभी अपने बचपन में सीखी थे और मेरी हिंदी शिक्षा के शुरू के दिनों से आज तक वैसे ही याद है. कविता है .....

                "मछली जल की रानी है
                जीवन उसका पानी है
                हाथ लगाओगे तो डर जाएगी
                बाहर निकालोगे तो मर जाएगी"

अंत में बच्चों ने अगले सप्ताहांत होने वाले कार्यक्रम का अभ्यास किया और गायत्री महा मंत्र का उच्चारण किया. इस प्रकार हिंदी प्राथमिक कक्षाओं के सत्र का  समापन हुआ और बच्चे अगले सप्ताहांत अपने अभिभावकों के लिए छोटा सा कार्यक्रम प्रस्तुत करके बड़े दिन की छुट्टियों पर चले जायेंगे.
                अगले वर्ष जनवरी माह में आशा है हम पुनः मिलेगे और बच्चों के उनके हिंदी ज्ञान और अभ्यास के आधार पर दो गुटों में बाँट कर हिंदी की दो कक्षाएं चलाएंगे. एक में अपनी इसी कक्षा को यानी "हिंदी प्राथमिक शिक्षा" को पढाया जायेगा और दूसरे गुट को हिंदी की अग्रिम कक्षा यानी "हिंदी परिचय कक्षा" में प्रवेश मिलेगा. इस हिंदी कक्षा के कुछ बच्चे मुझे आशा है की अग्रिम कक्षा में निसंदेह प्रवेश पा सकेंगे परन्तु, मुख्यता छोटी उम्र के बच्चों को पुनः प्राथमिक कक्षा में ही और अभ्यास करना होगा. हमारा प्रयास रहेगा की हम कुल मिला कर तीन कक्षाएं चला सकें, प्राथमिक, परिचय और प्रवीण. इन कक्षाओं में प्रवेश बच्चों की हिंदी ज्ञान और क्षमता के अनुसार ही प्रवेश मिल सकेगे और उसके लिए संभवतः हम प्रवेश से पहले एक छोटा सा टेस्ट भी ले सकते हैं. यह सूचना मैं सभी अभिभावकों के लिए प्रेषित करता हूँ जो अपने बच्चों को हिंदी शिक्षा का ज्ञान दिलवाना चाहते हैं यहाँ कार्दिफ्फ़ शहर में.           
                मैं इस ब्लॉग के माध्यम से उन अभिभावकों को भी विशेष धन्यवाद देना चाहता हूँ जिन्होंने अपने प्रयास से सभी बच्चों को अगले सप्ताहांत होने वाले कार्यक्रम के लिए तैयार किया. साथ में सभी अध्यापकों, सहायकों और अभिभावकों को हार्दिक धन्यवाद जिनके सहयोग से हिंदी के इस प्राथमिक सत्र का सफलता पूर्वक सञ्चालन हो सका.
धन्यवाद और शेष फिर.

Tuesday, 7 December 2010

मेरी छुटियाँ

मेरी छुटियाँ : दिनांक १९ नवम्बर २०१० से ५ दिसम्बर २०१० तक
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जैसा मैंने अपने पिछले ब्लॉग में लिखा था की मैं कुछ सप्ताहांतों के लिए छुट्टियों में जा रहा हूँ. अत: मेरी छुटियाँ समाप्त हुईं और में वापस इस ब्लॉग के माध्यम से आप लोगों के बीच पुनः उपस्थित हूँ. मेरी भारत यात्रा बहुत ही सुखद रही और परिवार, मित्रों और समाज के अन्य वर्ग से लोगों से भी अच्छा संपर्क हो सका. परन्तु मेरी वापस यात्रा के दौरान मुझे जो अनुभव हुआ वह मैं जरूर आप लोगों के जानकारी में लाऊंगा. जैसा की आप लोगों को शायद मालूम ही होगा की नयी दिल्ली हवाई अड्डे पर एक नया टर्मिनल बना है, टर्मिनल तीन, जो पिछले दिनों अपनी आधुनिक सुविधाओं और दिखावटी सुन्दरता के लिए बहुत चर्चा में रहा. अपनी वापस की यात्रा के दौरान मेरा हवाई जहाज़ टर्मिनल तीन से ही जाना था. अत: मैंने भी उसकी भव्यता के दर्शन किये. घूमते घूमते मेरे मन में एक हिंदी की पुस्तक खरीदने की इच्छा हुई जो में यात्रा के दौरान पढ़ सकूँ परन्तु आप को, मेरी ही तरह, यह जानकार आश्चर्य होगा की मुझे पूरे टर्मिनल में कहीं भी हिंदी की पुस्तक या उपन्यास नहीं मिला. फिर मैंने पूरे टर्मिनल का दौरा किया तो पाया की जैसे हम पर परोक्ष रूप से पाश्चात्य सभ्यता थोपी जा रही है और पूरा का पूरा सरकारी तंत्र इसमें जैसे मददत कर रहा हो कि कैसे भी हमारी युवा पीढ़ी जल्दी से जल्दी अपनी सभ्यता और संस्कृति के साथ साथ अपनी भाषा के प्रति भी उदासीन और अज्ञान बनी रहे. वहां पर हिंदी ही नहीं वरन भारत की किसी भी क्षेत्रीय अथवा उप भाषा की भी पुस्तकें उपलब्ध नहीं थें. अंग्रेजी कि तो बहुतायत में पुस्तकें थीं मगर भारतीय राज भाषा या क्षेत्रीय भाषा कि कोई भी पुस्तकें नहीं थीं. मेरी समझ में यह भारतीय भाषाओँ का अपनी ही भूमि और देश  में एक तरह का अपमान है. साथ ही वहां पर मैंने पश्चिम देशो की कंपनियां और उनके उत्पाद देखे मगर लगता था जैसे भारत में भारत की ही चीजें और वस्तुएं गायब हों. मैंने अपनी प्रतिक्रिया टर्मिनल के सूचना केंद्र में बैठे हुए महोदय से भी करवा दी और उन्होंने भी अपनी अनभिज्ञता और असमर्थता दिखाई. यह बहुत ही विचित्र तरह का व्यवसायिक उदारीकरण नहीं तो और क्या है जहाँ गाँधी जी के द्वारा पोषित और अनुमोदित घरेलु उद्योगों को प्राथमिकता और प्रोत्साहन न देकर सिर्फ मुनाफाखोरी के लिए व्यापार करना भर है. 
                         अब मैं यह ब्लॉग १२ दिसम्बर की अपनी हिंदी कक्षा के बाद ही अपडेट करूँगा. वैसे यह प्राथमिक हिंदी शिक्षा की अंतिम कक्षा होगी और इसके बाद हम लोग दिनांक १९ दिसम्बर को , याने उसके अगले रविवार को, एक छोटा सा कार्यक्रम करके इस कक्षा का समापन करेंगे. इस उत्सव में बच्चे राष्ट्रीय गान और एक छोटा सा हिंदी का नाटक करेंगे जिसके सारे संवाद हिंदी में ही होंगे. अत: में आपको अपने विगत दिनों में हुई यात्रा के अनुभव के बारे मैं सोचने के लिए छोड़े जा रहा हूँ और पुनः अगले ब्लॉग में मिलूँगा.

Sunday, 14 November 2010

पंद्रहवी कक्षा

पंद्रहवी कक्षा : दिनांक १४ नवम्बर २०१० दिन रविवार

आज की कक्षा में हम लोगों ने पुनः एक बार पिछली कक्षा में पढाया गए वर्णों और व्यंजनों के उच्चारण का पुनाराभ्यास किया. उसके बाद नए व्यंजनों के उच्चारण का भी अभ्यास किया. फिर ३० मिनिट्स के बाद हिंदी के कुछ वाक्यों के बोलने का अभ्यास किया. बच्चे रोमन लिपि में लिखे हुए हिंदी के वाक्यों का सहजता से उच्चारण कर पा रहे हैं. परन्तु रोमन लिपि कि जगह हिंदी में लिखे हुए वाक्यों को हम अपनी अगले सत्र की हिंदी कक्षाओं में सिखायेंगे. तब यह सुगमता पूर्वक समझाया जा सकेगा. बाद में बच्चों को घर पर कुछ अभ्यास करने को कहा गया है. अगली कुछ कक्षाओं में हम अब इन्ही वर्णमाला की वर्णों के उच्चारण का अभ्यास करेंगे और साथ में पहले से दी हुई रोमन लिपि में हिंदी के नए वाक्यों के उच्चारण का अभ्यास करेंगे. हमारा प्रयास है की बच्चे हिंदी कक्षाओं का अगला सत्र हिंदी बोलने से आरम्भ करें और हिंदी में ही बच्चों को वाक्यों के लिखने और पढ़ने हेतु समर्थ कर सकें. इसके पश्चात छोटे से एक ब्रेक के बाद हम सब ने मिल कर बच्चों के साथ कुछ खेल खेले और हमेशा की तरह गायत्री महा मंत्र के साथ सत्र का समापन किया.
अगले सप्तांत से मैं कुछ दिनों के अवकाश पर भारत प्रवास हेतु जा रहा हूँ. संभवतः ५ दिसम्बर तक में वापस ब्रिटेन आ जाऊँगा. उसके पश्चात ही मैं अब हिंदी कक्षाओं में भागीदार बन सकूँगा. तब तक मेरे सहयोगी श्री रवि जी पर इन कक्षाओं की जिम्मेदारी है और मुझे पूरा विश्वास है की रवि जी कुछ अभिभावकों की सहायता से हमारी इन हिंदी कक्षाओं को नियमित रूप से करवा सकेंगे. में व्यक्तिगत रूप से रवि जी और सभी अभिभावकों का उनके इस प्रयास के लिए अभिनन्दन करता हूँ और धन्यवाद भी प्रेषित करता हूँ.
और हाँ इसका अर्थ यह भी हुआ कि अब मैं यह अपना ब्लॉग ५ दिसम्बर दिन रविवार के बाद ही अपडेट कर पाऊंगा. इसलिए क्षमा प्रार्थी भी हूँ. परन्तु जैसा मैंने ऊपर कहा है कि हमारी अगली कुछ कक्षाओं में हिंदी वर्णों और रोमन लिपि में लिखे हुए वाक्यों का बच्चों को अभ्यास कराया जायेगा.
धन्यवाद और शुभम.....

Saturday, 13 November 2010

हिंदी भाषा का इतिहास - V : देवनागरी लिपि

'देवनागरी लिपि' एक लिपि का नाम है. हिंदी भाषा को लिखने के लिए हम देवनागरी लिपि का ही प्रयोग करते हैं. यह लिपि भारतीय उपमहाद्वीप की बहुत सारी भाषाओं और उपभाषाओं को लिखने में प्रयोग होती है. जैसे हिंदी, मराठी, नेपाली इत्यादि.
आठवी शताब्दी के आस पास में देवनागरी लिपि का उदय हुआ प्रतीत होता है.संस्कृत देवभाषा है अत: जिस लिपि में वह लिखी गयी वह ही देवनागरी लिपि है. सर्वप्रथम विजय नगर राज्य के लेखो में नागरी लिपि का प्रयोग देखने में मिलता है. आज दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराँचल, बिहार, झारखण्ड, मध्य प्रदेश, छतीसगढ़, राजस्थान, हिमांचल प्रदेश, महाराष्ट्र, नेपाल आदि की हिंदी, मराठी, नेपाली, संस्कृत की यही वाहिका है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३४३ में हिंदी 'देवनागरी लिपि' में ही भारत की राजभाषा है. 
देवनागरी लिपि की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित है
(i) यह बाएं से दाहिने ओर लिखी जाने वाली लिपि है
(i) इसकी वर्णमाला बहुत ही वैज्ञानिक है. जैसे यह क्रमहीन नहीं है, अ के बाद आ आता है ब नहीं. इसी प्रकार से हस्व-दीर्घ, अघोष-घोष, अल्पप्राण, महाप्राण, क्रमिक उच्चारण, अनुनासिकता आदि सभी क्रम से हैं.
(ii) इसमें उच्चारण और लेखनी में संगती है.अत: यदि वर्णमाला का ज्ञान है तो उच्चारित शब्द को सहज ही लिखा जा सकता है.
(iii) प्रत्येक ध्वनि के लिए स्वतंत्र वर्ण होने के कारण कहीं भी भ्रम की स्थिति नहीं है.
(iv) केवल उन्ही वर्णों को लिखा जाता है जिनका उच्चारण हो सकता है.
(v) इसमें लेखन-मुद्रण के वर्णों में भी एक रूपता है. रोमन लिपि के भांति नहीं की लेखन के अलग वर्ण हों और मुद्रण के लिए अलग, फिर उनमे भी छोटे और बड़े.
प्रसिद्ध कोशकार मोनियर विलियम्स का यह निष्कर्ष उचित ही है
"यह (देवनागरी) सभी ज्ञात लिपियों से अधिक पूर्ण और संतुलित है"
और (देवनागरी लिपि तथा हिंदी वर्तनी का मानकी करण, प्रकाशन : केंद्रीय हिंदी निदेशालय, भारत सरकार, १९८३ में इसका उल्लेख है कि इसमें जो न्यूनतायें थीं उनका निराकरण कर लिया गया है और अब यह विश्व कि किसी भी भाषा के लेखन के लिए पूर्णतया उपर्युक्त है. 

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सहायक ग्रन्थ सूची :
हिंदी सही लिखिए : डॉ रामरजपाल द्विवेदी
इन्टरनेट : 
http://www.ancientscripts.com/devanagari.html(08 Nov 2010)

Sunday, 7 November 2010

चौदहवीं कक्षा

चौदहवीं कक्षा : दिनांक ०७ नवम्बर २०१० दिन रविवार

आज की कक्षा में लगभग १० बच्चे थे. सबसे पहले आज बच्चों को २४ अक्टूबर को लिए गए टेस्ट (परीक्षा) का फीडबैक (प्रतिपुष्टि) दिया गया. इस परीक्षा में बच्चों ने अच्छा कार्य किया है और मैंने अपने फीडबैक में कुछ एक त्रुटियाँ सही करने को लिखा भी है. उसके उपरांत बच्चो ने सभी स्वरों और पहले १० व्यंजनों के उच्चारण का अभ्यास किया. फिर बच्चों को हिंदी, एक बोल चाल की भाषा के रूप में समझाई गयी और कुछ वाक्यों का अभ्यास भी करवाया गया जैसे "आप कैसे हो" इत्यादि. बच्चों ने एक दुसरे से यह प्रश्न किया और दूसरे बच्चे ने इसका उत्तर दिया. हिंदी, एक बोल चाल की भाषा के अभ्यास के लिए लिखित सामग्री (एक पेज) बच्चों में बांटी गयी. अब हम इसके बाद लगभग सभी कक्षाओं में हिंदी - बोल चाल भाषा का ही अभ्यास करेंगे. आज की कक्षा के बाद ऐसा लगा कि हम लोग शायद बच्चों की इस प्राथमिक कक्षा में उनसे कुछ वाक्य तो हिंदी में जरूर बोलवा सकेंगे. ५५ मिनट्स के बाद एक-दो खेल खेले गए और फिर दीपावली उत्सव पर एक बहुत ही संक्षिप्त परिचय बच्चों को दिया गया. अंत में गायत्री महा मंत्र के साथ कक्षा का समापन किया गया.
        आज कुछ अभिभावकों के साथ १९ दिसम्बर दिन रविवार को हिंदी कक्षा के वार्षिक उत्सव के आयोंजन पर विचार किया गया और अगले सफ्ताहंत तक प्रारंभिक तैयारिओं के बाद अंतिम निर्णय लिया जायेगा. इस प्रस्ताव हेतु १९ दिसम्बर को एक छोटे से प्ले और एक गीत का बच्चों से प्रस्तुत करवाए जाने का सुझाव है. देखिये क्या होता है. अगले सप्ताहांत तक मैं शायद और विवरण दे सकूँ. 
शेष फिर, धन्यवाद.

Wednesday, 3 November 2010

तेरहवी कक्षा

तेरहवी कक्षा : दिनांक ३१ अक्टूबर २०१० दिन रविवार

आज की कक्षा में फैन्सी ड्रेस की ही धूम रही. बच्चे बहुत ही उत्साहित थे. कक्षा के कार्य कलाप समझाने के बाद पहले हम सब ने लगभग ४५ मिनट्स तक हिंदी का अभ्यास किया. बच्चे जिन वस्त्रों या चरित्र में आये थे उसको हिंदी में लिखना सिखाया गया. अंत के कुछ व्यंजनों जैसे क्ष, त्र, ज्ञ की अभ्यास शीट दी गयी जिसका अभ्यास  बच्चे घर पर लिख कर करेंगे. इसी के साथ अब स्वरों और व्यंजनों को लिखने के अभ्यास का समापन हो गया. बच्चे अब वर्णमाला को पहचान सकते हैं और यदा कदा सही उच्चारण भी करते हैं. अब हमारा ध्यान मात्राओ  की सहायता से सामान्य बोलचाल की हिंदी भाषा का बच्चों को अभ्यास करवाना हैं. अगली कक्षा में हम हिंदी, एक बोलचाल की भाषा के रूप में पढ़ाएंगे.
       आज ४५ मिनट्स की कक्षा के बाद बच्चों ने अपने चरित्रों के बारे मैं सबको बताया. कोई बच्चा रावण, कुम्भकरण, मेघनाथ, रावण की सेना के राक्षस और कोई सूर्पनखा तो कोई बच्चा अहि रावण की वेशभूषा में आया था. बच्चों के मुह से इन चरित्रों के बारे में सुनकर बड़ा ही अच्छा लगा. उसके बाद बच्चों ने थोडा कला-शिल्प में दीपावली का एक सुन्दर कार्ड बनाया. हमेशा की तरह सभी ने मिलकर गायत्री महामंत्र के गायन के साथ कक्षा का समापन किया.