Sunday, 14 November 2010

पंद्रहवी कक्षा

पंद्रहवी कक्षा : दिनांक १४ नवम्बर २०१० दिन रविवार

आज की कक्षा में हम लोगों ने पुनः एक बार पिछली कक्षा में पढाया गए वर्णों और व्यंजनों के उच्चारण का पुनाराभ्यास किया. उसके बाद नए व्यंजनों के उच्चारण का भी अभ्यास किया. फिर ३० मिनिट्स के बाद हिंदी के कुछ वाक्यों के बोलने का अभ्यास किया. बच्चे रोमन लिपि में लिखे हुए हिंदी के वाक्यों का सहजता से उच्चारण कर पा रहे हैं. परन्तु रोमन लिपि कि जगह हिंदी में लिखे हुए वाक्यों को हम अपनी अगले सत्र की हिंदी कक्षाओं में सिखायेंगे. तब यह सुगमता पूर्वक समझाया जा सकेगा. बाद में बच्चों को घर पर कुछ अभ्यास करने को कहा गया है. अगली कुछ कक्षाओं में हम अब इन्ही वर्णमाला की वर्णों के उच्चारण का अभ्यास करेंगे और साथ में पहले से दी हुई रोमन लिपि में हिंदी के नए वाक्यों के उच्चारण का अभ्यास करेंगे. हमारा प्रयास है की बच्चे हिंदी कक्षाओं का अगला सत्र हिंदी बोलने से आरम्भ करें और हिंदी में ही बच्चों को वाक्यों के लिखने और पढ़ने हेतु समर्थ कर सकें. इसके पश्चात छोटे से एक ब्रेक के बाद हम सब ने मिल कर बच्चों के साथ कुछ खेल खेले और हमेशा की तरह गायत्री महा मंत्र के साथ सत्र का समापन किया.
अगले सप्तांत से मैं कुछ दिनों के अवकाश पर भारत प्रवास हेतु जा रहा हूँ. संभवतः ५ दिसम्बर तक में वापस ब्रिटेन आ जाऊँगा. उसके पश्चात ही मैं अब हिंदी कक्षाओं में भागीदार बन सकूँगा. तब तक मेरे सहयोगी श्री रवि जी पर इन कक्षाओं की जिम्मेदारी है और मुझे पूरा विश्वास है की रवि जी कुछ अभिभावकों की सहायता से हमारी इन हिंदी कक्षाओं को नियमित रूप से करवा सकेंगे. में व्यक्तिगत रूप से रवि जी और सभी अभिभावकों का उनके इस प्रयास के लिए अभिनन्दन करता हूँ और धन्यवाद भी प्रेषित करता हूँ.
और हाँ इसका अर्थ यह भी हुआ कि अब मैं यह अपना ब्लॉग ५ दिसम्बर दिन रविवार के बाद ही अपडेट कर पाऊंगा. इसलिए क्षमा प्रार्थी भी हूँ. परन्तु जैसा मैंने ऊपर कहा है कि हमारी अगली कुछ कक्षाओं में हिंदी वर्णों और रोमन लिपि में लिखे हुए वाक्यों का बच्चों को अभ्यास कराया जायेगा.
धन्यवाद और शुभम.....

Saturday, 13 November 2010

हिंदी भाषा का इतिहास - V : देवनागरी लिपि

'देवनागरी लिपि' एक लिपि का नाम है. हिंदी भाषा को लिखने के लिए हम देवनागरी लिपि का ही प्रयोग करते हैं. यह लिपि भारतीय उपमहाद्वीप की बहुत सारी भाषाओं और उपभाषाओं को लिखने में प्रयोग होती है. जैसे हिंदी, मराठी, नेपाली इत्यादि.
आठवी शताब्दी के आस पास में देवनागरी लिपि का उदय हुआ प्रतीत होता है.संस्कृत देवभाषा है अत: जिस लिपि में वह लिखी गयी वह ही देवनागरी लिपि है. सर्वप्रथम विजय नगर राज्य के लेखो में नागरी लिपि का प्रयोग देखने में मिलता है. आज दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराँचल, बिहार, झारखण्ड, मध्य प्रदेश, छतीसगढ़, राजस्थान, हिमांचल प्रदेश, महाराष्ट्र, नेपाल आदि की हिंदी, मराठी, नेपाली, संस्कृत की यही वाहिका है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३४३ में हिंदी 'देवनागरी लिपि' में ही भारत की राजभाषा है. 
देवनागरी लिपि की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित है
(i) यह बाएं से दाहिने ओर लिखी जाने वाली लिपि है
(i) इसकी वर्णमाला बहुत ही वैज्ञानिक है. जैसे यह क्रमहीन नहीं है, अ के बाद आ आता है ब नहीं. इसी प्रकार से हस्व-दीर्घ, अघोष-घोष, अल्पप्राण, महाप्राण, क्रमिक उच्चारण, अनुनासिकता आदि सभी क्रम से हैं.
(ii) इसमें उच्चारण और लेखनी में संगती है.अत: यदि वर्णमाला का ज्ञान है तो उच्चारित शब्द को सहज ही लिखा जा सकता है.
(iii) प्रत्येक ध्वनि के लिए स्वतंत्र वर्ण होने के कारण कहीं भी भ्रम की स्थिति नहीं है.
(iv) केवल उन्ही वर्णों को लिखा जाता है जिनका उच्चारण हो सकता है.
(v) इसमें लेखन-मुद्रण के वर्णों में भी एक रूपता है. रोमन लिपि के भांति नहीं की लेखन के अलग वर्ण हों और मुद्रण के लिए अलग, फिर उनमे भी छोटे और बड़े.
प्रसिद्ध कोशकार मोनियर विलियम्स का यह निष्कर्ष उचित ही है
"यह (देवनागरी) सभी ज्ञात लिपियों से अधिक पूर्ण और संतुलित है"
और (देवनागरी लिपि तथा हिंदी वर्तनी का मानकी करण, प्रकाशन : केंद्रीय हिंदी निदेशालय, भारत सरकार, १९८३ में इसका उल्लेख है कि इसमें जो न्यूनतायें थीं उनका निराकरण कर लिया गया है और अब यह विश्व कि किसी भी भाषा के लेखन के लिए पूर्णतया उपर्युक्त है. 

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सहायक ग्रन्थ सूची :
हिंदी सही लिखिए : डॉ रामरजपाल द्विवेदी
इन्टरनेट : 
http://www.ancientscripts.com/devanagari.html(08 Nov 2010)

Sunday, 7 November 2010

चौदहवीं कक्षा

चौदहवीं कक्षा : दिनांक ०७ नवम्बर २०१० दिन रविवार

आज की कक्षा में लगभग १० बच्चे थे. सबसे पहले आज बच्चों को २४ अक्टूबर को लिए गए टेस्ट (परीक्षा) का फीडबैक (प्रतिपुष्टि) दिया गया. इस परीक्षा में बच्चों ने अच्छा कार्य किया है और मैंने अपने फीडबैक में कुछ एक त्रुटियाँ सही करने को लिखा भी है. उसके उपरांत बच्चो ने सभी स्वरों और पहले १० व्यंजनों के उच्चारण का अभ्यास किया. फिर बच्चों को हिंदी, एक बोल चाल की भाषा के रूप में समझाई गयी और कुछ वाक्यों का अभ्यास भी करवाया गया जैसे "आप कैसे हो" इत्यादि. बच्चों ने एक दुसरे से यह प्रश्न किया और दूसरे बच्चे ने इसका उत्तर दिया. हिंदी, एक बोल चाल की भाषा के अभ्यास के लिए लिखित सामग्री (एक पेज) बच्चों में बांटी गयी. अब हम इसके बाद लगभग सभी कक्षाओं में हिंदी - बोल चाल भाषा का ही अभ्यास करेंगे. आज की कक्षा के बाद ऐसा लगा कि हम लोग शायद बच्चों की इस प्राथमिक कक्षा में उनसे कुछ वाक्य तो हिंदी में जरूर बोलवा सकेंगे. ५५ मिनट्स के बाद एक-दो खेल खेले गए और फिर दीपावली उत्सव पर एक बहुत ही संक्षिप्त परिचय बच्चों को दिया गया. अंत में गायत्री महा मंत्र के साथ कक्षा का समापन किया गया.
        आज कुछ अभिभावकों के साथ १९ दिसम्बर दिन रविवार को हिंदी कक्षा के वार्षिक उत्सव के आयोंजन पर विचार किया गया और अगले सफ्ताहंत तक प्रारंभिक तैयारिओं के बाद अंतिम निर्णय लिया जायेगा. इस प्रस्ताव हेतु १९ दिसम्बर को एक छोटे से प्ले और एक गीत का बच्चों से प्रस्तुत करवाए जाने का सुझाव है. देखिये क्या होता है. अगले सप्ताहांत तक मैं शायद और विवरण दे सकूँ. 
शेष फिर, धन्यवाद.

Wednesday, 3 November 2010

तेरहवी कक्षा

तेरहवी कक्षा : दिनांक ३१ अक्टूबर २०१० दिन रविवार

आज की कक्षा में फैन्सी ड्रेस की ही धूम रही. बच्चे बहुत ही उत्साहित थे. कक्षा के कार्य कलाप समझाने के बाद पहले हम सब ने लगभग ४५ मिनट्स तक हिंदी का अभ्यास किया. बच्चे जिन वस्त्रों या चरित्र में आये थे उसको हिंदी में लिखना सिखाया गया. अंत के कुछ व्यंजनों जैसे क्ष, त्र, ज्ञ की अभ्यास शीट दी गयी जिसका अभ्यास  बच्चे घर पर लिख कर करेंगे. इसी के साथ अब स्वरों और व्यंजनों को लिखने के अभ्यास का समापन हो गया. बच्चे अब वर्णमाला को पहचान सकते हैं और यदा कदा सही उच्चारण भी करते हैं. अब हमारा ध्यान मात्राओ  की सहायता से सामान्य बोलचाल की हिंदी भाषा का बच्चों को अभ्यास करवाना हैं. अगली कक्षा में हम हिंदी, एक बोलचाल की भाषा के रूप में पढ़ाएंगे.
       आज ४५ मिनट्स की कक्षा के बाद बच्चों ने अपने चरित्रों के बारे मैं सबको बताया. कोई बच्चा रावण, कुम्भकरण, मेघनाथ, रावण की सेना के राक्षस और कोई सूर्पनखा तो कोई बच्चा अहि रावण की वेशभूषा में आया था. बच्चों के मुह से इन चरित्रों के बारे में सुनकर बड़ा ही अच्छा लगा. उसके बाद बच्चों ने थोडा कला-शिल्प में दीपावली का एक सुन्दर कार्ड बनाया. हमेशा की तरह सभी ने मिलकर गायत्री महामंत्र के गायन के साथ कक्षा का समापन किया.

Sunday, 24 October 2010

बारहवी कक्षा

बारहवी कक्षा : दिनांक २४ अक्टूबर २०१० दिन रविवार

आज सबसे पहले बच्चों को कक्षा में होने वाले कार्यकलाप के बारे में बताया गया. फिर बच्चों की परीक्षा ली गयी. इस परीक्षा का उद्देश्य बच्चों का अभी तक के अभ्यास को परखना था. बच्चो को केवल कक्षा की उच्चारण सूचिका से रोमन लिपि में लिखे हुए शब्दों को पहचान कर लिखना था. ५ से ८ साल के बच्चों का खुली पुस्तक के आधार पर परीक्षा ली गयी और ८ से १२ साल तक के बच्चों का बिना पुस्तक की परीक्षा ली गयी.यह परीक्षा ३० मिनट की थी और बच्चों ने उत्साहपूर्वक इसमें भाग लिया.परीक्षा के अंत में कुछ वर्णों, जैसे श, ष, स, ह की प्रैक्टिस शीट दी गयी. बच्चों को इन वर्णों के लिखने का घर पर अभ्यास करना होगा. इसी के साथ  बच्चों को बड़े आकर की शीट में सम्पूर्ण हिंदी वर्णमाला भी दी गयी है. बच्चे इसे अपने घर पर दीवार पर चस्पा कर के ज्यादा और लगातार अभ्यास कर सकते हैं.
                    परीक्षा के बाद बच्चों को अगली कक्षा में होने वाली विषय "मात्राओं" के बारे में संक्षेप में बताया गया. वर्णों के अभ्यास के बाद अगली कक्षा में हम मात्राओं पर ध्यान देंगे. आज से हमारी कक्षा में व्यकल्पिक अध्यापक की व्यवस्था हो गयी है. उनका नाम श्री रवि जी है और उनकी बेटी भी कक्षा में पड़ती है. रवि जी कुछ कक्षाओं में अभी अभ्यास कर के फिर कक्षा लेंगे.
                    
आज की कक्षा का अंत सभी के संक्षिप्त परिचय के साथ हुआ. और साथ में कुछ अभिभावकों  ने बच्चों को आने वाली हिन्दू उत्सव दीपावली के महत्त्व पर शैक्षिक ज्ञान दिया. अगले सप्ताहांत बच्चों को विशिष्ट परिवेश में आने को कहा गया है क्योंकि कक्षा में हम लोग फैंसी ड्रेस का आयोजन कर रहे हैं. इस अवसर पर बच्चों को हिन्दू महा काव्य "राम चरित मानस" के खराब चरित्रों, जैसे रावन, सूर्पनखा इत्यादि, के परिवेश में आना है. इसका कारण यह है की उसके अगले सप्ताह Halloween और दीपावली उत्सव है और इस फैंसी ड्रेस कार्यक्रम के द्वारा हम कक्षा में बच्चों को इन उत्सवों का महत्त्व पढ़ाएंगे. साथ में उन ख़राब चरित्रों के नाम भी लिखना बताएँगे. आशा है बच्चे इस उत्सव और अगली कक्षा का सप्ताहांत में आनंद उठायेंगे.

Sunday, 17 October 2010

हिंदी भाषा का इतिहास - IV : लिपि

लिपि (Script) एक प्रकार से कुछ संकेतों का बंडल है जिसका उपर्युक्त प्रयोग लेखन क्रिया (Writing System) में किया जाता है. दूसरे शब्दों में श्रव्य ध्वनियों (भाषा) को द्रश्य रूप देने वाली प्रतीक व्यवस्था लिपि कहलाती है.
    वास्तव में भाषा के बाद मनुष्य का श्रेष्ठ अविष्कार लेखन ही है. आज संसार में लगभग चार सौ से अधिक लिपियाँ हैं और सभी अपनी अपनी लिपि को ही प्राचीन, महत्वपूर्ण, पूर्ण और ईश्वर निर्मित ही के कारण पवित्रतम मानते हैं. अपने यहाँ जैसे लिपि की निर्माता ब्रह्मा जी माने गए हैं. अत: भाषा की ही भांति लिपि का इतिहास भी अनुमाश्रित ही है परन्तु आदि काल में मनुष्य को कुछ न कुछ लेखन कला जरूर आती थी. उद्धरण के लिए हनुमान जी ने सीता जी को मनोहर राम-नाम अंकित मुद्रिका दिखाई थी. सीता जी ने राम की लिखाई पहचान ली होगी तभी वानर पर विश्वास किया.
इसके अतिरिक्त पंडित राजबली पांडेय जी ने इंडियन पेलिओग्राफी में एवं अनन्य में भरा में लिपि-विकास का सविस्तार वर्णन किया है. जिसका सार-संक्षेप यों है :
-- ह्वेनसांग (६३०-६४४ इ) भारत से लगभग ६५० पुस्तकें लादकर ले गया था जिसको लिखने में कई शताब्दियाँ लगी होंगी.
-- इंडिका में मेगस्थनीस (चौथी शताब्दी इ. पूर्व) गवाह हैं की यहाँ प्रस्तर फलकों पर खोदकर लिखा जाता था और जन्मपत्रियाँ बनाई जाती थीं.
-तीसरी शताब्दी ई पूर्व के अशोक के दसियों स्तम्भ लेख और शिलालेख उपलब्ध हैं जो भारत की लेखन कला के जीते जागते प्रमाण हैं.
-वैदिक साहित्य विश्व का प्राचीनतम साहित्य है जो आज भी यथावत रूप में उपलब्ध है. लिपि के अभाव में उसे इतनी उम्र नहीं मिल सकती थी.
-ऋग्वेद (६ / ५३ / ७) में आरिख पद मिलता है जो आलेख अर्थात लिपि का ही अपर नाम है.
        इसके अतिरिक्त लौकिक साहित्य में भी कम संकेत नहीं. रामायण में, जैसा पूर्व में कहा गया कि अंगूठी राम-नाम से अंकित थी -  "रामनामांकित चेदं पश्य देव्यंगुलीयकम"
समग्र वाड्मय को देखने से पता चलता है कि प्राचीन भारत में मुख्यतया तीन लिपियाँ प्रचलन में थीं
(i) सैन्धव लिपि
    १८५६ में जनरल कनिघम ने हड़प्पा कि यात्रा के दौरान सिन्धु - लिपि में लिखी कुछ मुहरें प्राप्त की थीं)
(ii) ब्राह्मी लिपि
    यह भारतवर्ष के आर्यों का अपनी खोज से उत्पन्न किया हुआ मौलिक आविष्कार है इसकी प्राचीनता और सर्वांगसुन्दरता के कारण इसके कर्ता ब्रह्मा जी को माना गया है और इसीलिए यह ब्राह्मी लिपि कहलाई. ई0 पूर्व पांचवी शताब्दी से नौ सौ वर्षों तक प्राप्त भारतीय शिलालेख बाएं ओर से दायें ओर लिखी जाने वाली ब्राह्मी लिपि ही है.
(iii) खरोष्टि लिपि
    ब्राह्मी लिपि के साथ साथ खरोष्टि लिपि भी भारत की प्राचीनतम लिपि है. इ पूर्व तीसरी शताब्दी में भारत के उत्तर पूर्व सीमान्त प्रान्त के आस पास यह गंधार प्रदेश में प्रचलित थी
                      देव नागरी अथवा नागरी लिपि भारत की प्राचीन लिपि ब्राह्मी की ही सर्वश्रेष्ठ संतान है. जिसमे आज संस्कृत, हिंदी, मराठी, नेपाली आदि भाषाएँ लिखी जा रही हैं और जिनका उपयोग दिन-ब-दिन बढता ही जा रहा है. "नागरी अंक और अक्षर एवम भारतीय प्राचीन लिपिमाला"  में ओझा जी लिखते हैं
"जिनको प्राचीन लिपियों का परिचय नहीं है, वे सहसा यह स्वीकार नहीं करेंगे की हमारे देश की नागरी, शारदा, गुरुमुखी, बंगला, उड़िया, तेलुगु, कन्नड़, तमिल, आदि समस्त लिपियाँ एक ही मूल लिपि ब्राहमी से निकली हैं"

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सहायक ग्रन्थ सूची :

हिंदी साहित्य का संछिप्त इतिहास - NCERT - कक्षा १२
हिंदी सही लिखिए : डॉ रामरजपाल द्विवेदी
नागरी अंक और अक्षर एवं भारतीय प्राचीन लिपि माला : ओझा
इंडियन पेलिओग्राफी : ए एच दानी
इंडियन पेलिओग्राफी : डॉ राजबली पांडेय
इन्टरनेट : 
http://www.hindubooks.org/david_frawley/myth_aryan_invasion/indus_writing/indus_writing.htm(21 Sept 2010)

Sunday, 10 October 2010

ग्यारहवी कक्षा

ग्यारहवी कक्षा : दिनांक १० दिसम्बर २०१०, दिन रविवार

आज की कक्षा की शुरुवात एक नैतिक कहानी से हुई और बच्चों को हिंदी सीखने के लिए निरत प्रयास के महत्त्व पर शिक्षा दी गयी. फिर मैंने बच्चों को दो वर्णों को जोड़कर शब्द बनाने का अभ्यास कराया. यह अभ्यास , मेरी दृष्टी से, हिंदी सीखने की दिशा में एक कठिन मगर महत्वपूर्ण कड़ी है. परन्तु मुझे बड़ी ख़ुशी हुई जब ज्यादातर बच्चों ने अधिकतर दो वर्णों के शब्दों का बहुत ही सुन्दर उच्चारण किया. कुछ बच्चों का उच्चारण तो बहुत ही स्पष्ट था. एक छोटे से ब्रेक के बाद बच्चों ने व और श केवल दो वर्णों के लेखन और उच्चारण का अभ्यास किया. अंत में बच्चों ने दो खेलों को खूब जोश से खेला. शिक्षा का समापन गायत्री महामंत्र के साथ हुआ और हम सब ने मिल कर तीन बार साथ में गायत्री महामंत्र का उच्चारण किया.
आजकल कम्युनिटी सेंटर में नवरात्र का उत्सव होने के कारण लोगों का बहुत आना जाना होता है और इसलिए कभी कभी कक्षा में व्यवधान भी पड़ता है. हमें आशा है कि यह व्यवधान नवरात्र उत्सव के साथ ही समाप्त हो जायेगा. 
अगले सप्ताहांत (१७ अक्टूबर को) अभिभावक और अध्यापक बैठक है और इसमें हिंदी सिखाने के लिए कैसे सब मिलकर काम करें इस पर चर्चा होनी है.  बैठक का समय प्रातः १०:०० बजे से ११:०० बजे तक है. अत: अगले सप्ताहांत हिंदी कक्षा नहीं होगी.

हमारी अगली कक्षा २४ अक्टूबर दिन रविवार को है इस दिन बच्चों की एक छोटी से परीक्षा ली जाएगी और देखेंगे कि बच्चों ने कितना सीखा है. यह परीक्षा हिंदी के वर्णों को पहचानने पर आधारित होगी.यह ४५ मिनट की परीक्षा है इसका समय १० बजे से १०:४५ है. (परीक्षा के बाद) २४ अक्टूबर की कक्षा में तीन और चार वर्णों को जोड़कर शब्दों का अभ्यास भी  कराया जायेगा.
आप सभी को देवी नवरात्र उत्सव पर बहुत सारी शुभकामनाएं.शेष फिर अगली कक्षा में बाद.
धन्यवाद.