Saturday, 13 November 2010

हिंदी भाषा का इतिहास - V : देवनागरी लिपि

'देवनागरी लिपि' एक लिपि का नाम है. हिंदी भाषा को लिखने के लिए हम देवनागरी लिपि का ही प्रयोग करते हैं. यह लिपि भारतीय उपमहाद्वीप की बहुत सारी भाषाओं और उपभाषाओं को लिखने में प्रयोग होती है. जैसे हिंदी, मराठी, नेपाली इत्यादि.
आठवी शताब्दी के आस पास में देवनागरी लिपि का उदय हुआ प्रतीत होता है.संस्कृत देवभाषा है अत: जिस लिपि में वह लिखी गयी वह ही देवनागरी लिपि है. सर्वप्रथम विजय नगर राज्य के लेखो में नागरी लिपि का प्रयोग देखने में मिलता है. आज दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराँचल, बिहार, झारखण्ड, मध्य प्रदेश, छतीसगढ़, राजस्थान, हिमांचल प्रदेश, महाराष्ट्र, नेपाल आदि की हिंदी, मराठी, नेपाली, संस्कृत की यही वाहिका है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३४३ में हिंदी 'देवनागरी लिपि' में ही भारत की राजभाषा है. 
देवनागरी लिपि की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित है
(i) यह बाएं से दाहिने ओर लिखी जाने वाली लिपि है
(i) इसकी वर्णमाला बहुत ही वैज्ञानिक है. जैसे यह क्रमहीन नहीं है, अ के बाद आ आता है ब नहीं. इसी प्रकार से हस्व-दीर्घ, अघोष-घोष, अल्पप्राण, महाप्राण, क्रमिक उच्चारण, अनुनासिकता आदि सभी क्रम से हैं.
(ii) इसमें उच्चारण और लेखनी में संगती है.अत: यदि वर्णमाला का ज्ञान है तो उच्चारित शब्द को सहज ही लिखा जा सकता है.
(iii) प्रत्येक ध्वनि के लिए स्वतंत्र वर्ण होने के कारण कहीं भी भ्रम की स्थिति नहीं है.
(iv) केवल उन्ही वर्णों को लिखा जाता है जिनका उच्चारण हो सकता है.
(v) इसमें लेखन-मुद्रण के वर्णों में भी एक रूपता है. रोमन लिपि के भांति नहीं की लेखन के अलग वर्ण हों और मुद्रण के लिए अलग, फिर उनमे भी छोटे और बड़े.
प्रसिद्ध कोशकार मोनियर विलियम्स का यह निष्कर्ष उचित ही है
"यह (देवनागरी) सभी ज्ञात लिपियों से अधिक पूर्ण और संतुलित है"
और (देवनागरी लिपि तथा हिंदी वर्तनी का मानकी करण, प्रकाशन : केंद्रीय हिंदी निदेशालय, भारत सरकार, १९८३ में इसका उल्लेख है कि इसमें जो न्यूनतायें थीं उनका निराकरण कर लिया गया है और अब यह विश्व कि किसी भी भाषा के लेखन के लिए पूर्णतया उपर्युक्त है. 

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सहायक ग्रन्थ सूची :
हिंदी सही लिखिए : डॉ रामरजपाल द्विवेदी
इन्टरनेट : 
http://www.ancientscripts.com/devanagari.html(08 Nov 2010)

1 comment:

  1. अच्छी जानकारी. . हम सोच रहे थे की इस लिपि का प्रयोग ९ वीं सदी में आया था. जब देवनागरी नहीं थी तब भी संस्कृत लिखी जाती थी. तत्समय की ब्राह्मी में.

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